श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 105: नहुषका पतन, शतक्रतुका इन्द्रपदपर पुन: अभिषेक तथा दीपदानकी महिमा  »  श्लोक 37-38h
 
 
श्लोक  13.105.37-38h 
सोऽभिषिक्तो भगवता देवराज्ये च वासव:॥ ३७॥
ब्रह्मणा राजशार्दूल यथापूर्वं व्यरोचत।
 
 
अनुवाद
राजसिंह! शतक्रतु इन्द्र को ब्रह्माजी ने देवताओं के राजा पद पर अभिषिक्त किया और वे पुनः पहले जैसी शोभा प्राप्त करने लगे ॥37 1/2॥
 
Rajsingh! Shatkratu Indra was anointed by Lord Brahma to the post of King of Gods and started regaining his beauty as before. 37 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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