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mahabharat 13.105.33: उस समय भृगु ने नहुष को पृथ्वी पर फेंक दिया और ब्रह्माजी के धाम में जाकर उन्हें यह सब समाचार सुनाया।   |   mahabharat अध्याय 13.105: नहुषका पतन, शतक्रतुका इन्द्रपदपर पुन: अभिषेक तथा दीपदानकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.105.33 
तदा स पातयित्वा तं नहुषं भूतले भृगु:।
जगाम ब्रह्मभवनं ब्रह्मणे च न्यवेदयत् ॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
उस समय भृगु ने नहुष को पृथ्वी पर फेंक दिया और ब्रह्माजी के धाम में जाकर उन्हें यह सब समाचार सुनाया।
 
At that time Bhrigu, having thrown Nahush on the earth, went to the abode of Brahmaji and related all this news to him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)