श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 105: नहुषका पतन, शतक्रतुका इन्द्रपदपर पुन: अभिषेक तथा दीपदानकी महिमा  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  13.105.30 
भृगुरुवाच
राजा युधिष्ठिरो नाम भविष्यति कुलोद्वह:।
स त्वां मोक्षयिता शापादित्युक्त्वान्तरधीयत॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
भृगु बोले - हे राजन! तुम्हारे कुल में श्रेष्ठ युधिष्ठिर नामक एक राजा होंगे, जो तुम्हें इस शाप से मुक्त कर देंगे। इतना कहकर भृगु अंतर्ध्यान हो गए।
 
Bhrigu said - O King! There will be a king in your clan, the best among them, named Yudhishthira, who will free you from this curse. Having said this, Bhrigu disappeared.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)