Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.105.23-25h: सिर पर प्रहार होते ही जटाओं के भीतर विराजमान महर्षि भृगु अत्यंत क्रोधित हो गए और उन्होंने पापात्मा नहुष को इस प्रकार शाप दिया - 'हे दुष्ट! तूने क्रोधपूर्वक इस महामुनि के सिर पर लात मारी है, अतः तू शीघ्र ही सर्प बनकर पृथ्वी पर चला जा। | mahabharat अध्याय 13.105: नहुषका पतन, शतक्रतुका इन्द्रपदपर पुन: अभिषेक तथा दीपदानकी महिमा । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सिर पर प्रहार होते ही जटाओं के भीतर विराजमान महर्षि भृगु अत्यंत क्रोधित हो गए और उन्होंने पापात्मा नहुष को इस प्रकार शाप दिया - 'हे दुष्ट! तूने क्रोधपूर्वक इस महामुनि के सिर पर लात मारी है, अतः तू शीघ्र ही सर्प बनकर पृथ्वी पर चला जा।
As soon as he got hit on his head, Maharishi Bhrigu, sitting inside the matted hair, became extremely angry and cursed Nahusha, the sinful soul, in this manner – ‘O evil one! You have angrily kicked this great sage in the head, hence you should quickly turn into a snake and go to earth.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥