Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.105.22-23h: भरत! जब राजा नहुष उन्हें कोड़े से मारने लगे, तब भी वे धर्मात्मा ऋषि शांत नहीं हुए। तब क्रोधित देवराज ने अपने बाएं पैर से महात्मा अगस्त्य के सिर पर प्रहार किया। | mahabharat अध्याय 13.105: नहुषका पतन, शतक्रतुका इन्द्रपदपर पुन: अभिषेक तथा दीपदानकी महिमा । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तं तु राजा प्रतोदेन चोदयामास भारत।
न चुकोप स धर्मात्मा तत: पादेन देवराट्॥ २२॥
अगस्त्यस्य तदा क्रुद्धो वामेनाभ्यहनच्छिर:।
अनुवाद
भरत! जब राजा नहुष उन्हें कोड़े से मारने लगे, तब भी वे धर्मात्मा ऋषि शांत नहीं हुए। तब क्रोधित देवराज ने अपने बाएं पैर से महात्मा अगस्त्य के सिर पर प्रहार किया।
Bhaarat! Even when King Nahush started driving him with a whip, the pious sage did not lose his temper. Then the enraged king of gods struck Mahatma Agastya on the head with his left foot.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥