श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 105: नहुषका पतन, शतक्रतुका इन्द्रपदपर पुन: अभिषेक तथा दीपदानकी महिमा  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  13.105.2 
भीष्म उवाच
एवं तयो: संवदतो: क्रियास्तस्य महात्मन:।
सर्वा एव प्रवर्तन्ते या दिव्या याश्च मानुषी:॥ २॥
 
 
अनुवाद
भीष्म बोले- राजन्! जिस समय महर्षि भृगु और अगस्त्य उपर्युक्त वार्तालाप कर रहे थे, उस समय महामना नहुष के घर में समस्त दैवी और मानवीय क्रियाकलाप चल रहे थे।
 
Bhishma said- King! When Maharishi Bhrigu and Agastya were having the above conversation, at that time all the divine and human activities were going on in the house of Mahamana Nahush.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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