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mahabharat 13.105.1: युधिष्ठिर ने पूछा - पितामह ! राजा नहुष पर क्या विपत्ति आई ? वे किस प्रकार पृथ्वी पर गिराए गए और किस प्रकार इन्द्र के पद से वंचित हुए ? कृपया मुझे यह बताइए ॥1॥   |   mahabharat अध्याय 13.105: नहुषका पतन, शतक्रतुका इन्द्रपदपर पुन: अभिषेक तथा दीपदानकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.105.1 
युधिष्ठिर उवाच
कथं वै स विपन्नश्च कथं वै पातितो भुवि।
कथं चानिन्द्रतां प्राप्तस्तद् भवान् वक्तुमर्हति॥ १॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा - पितामह ! राजा नहुष पर क्या विपत्ति आई ? वे किस प्रकार पृथ्वी पर गिराए गए और किस प्रकार इन्द्र के पद से वंचित हुए ? कृपया मुझे यह बताइए ॥1॥
 
Yudhishthira asked - Grandfather! What kind of calamity befell King Nahush? How was he thrown to the earth and how was he deprived of the position of Indra? Please tell me this.॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)