श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 104: नहुषका ऋषियोंपर अत्याचार तथा उसके प्रतीकारके लिये महर्षि भृगु और अगस्त्यकी बातचीत  »  श्लोक 7-8
 
 
श्लोक  13.104.7-8 
अग्निकार्याणि समिध: कुशा: सुमनसस्तथा।
बलयश्चान्नलाजाभिर्धूपनं दीपकर्म च॥ ७॥
सर्वं तस्य गृहे राज्ञ: प्रावर्तत महात्मन:।
जपयज्ञान्मनोयज्ञांस्त्रिदिवेऽपि चकार स:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
महामनस्वी राजा नहुष के घर में अग्निहोत्र, हवन, कुशा, पुष्प, अन्न और लावा, धूप और दीप-ये सब प्रतिदिन होते थे। स्वर्ग में रहते हुए भी वे जप-यज्ञ और मनोयज्ञ (ध्यान) करते रहते थे।॥7-8॥
 
Agnihotra, offering of firewood, kusha, flowers, food and lava, offering of incense and lamp-all these were performed daily in the house of the great-minded king Nahush. Even while living in heaven, he used to perform Japa-Yagya and Manoyagya (meditation).॥ 7-8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)