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mahabharat 13.104.5: हे राजन! स्वर्ग में रहते हुए भी शुद्ध हृदय वाले राजा नहुष नाना प्रकार के दिव्य और मानवीय कर्म किया करते थे॥5॥   |   mahabharat अध्याय 13.104: नहुषका ऋषियोंपर अत्याचार तथा उसके प्रतीकारके लिये महर्षि भृगु और अगस्त्यकी बातचीत   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.104.5 
तत्रापि प्रयतो राजन् नहुषस्त्रिदिवे वसन्।
मानुषीश्चैव दिव्याश्च कुर्वाणो विविधा: क्रिया:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! स्वर्ग में रहते हुए भी शुद्ध हृदय वाले राजा नहुष नाना प्रकार के दिव्य और मानवीय कर्म किया करते थे॥5॥
 
O King! Even while residing in heaven, the pure-hearted King Nahush used to perform various kinds of divine and humane deeds. ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)