श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 104: नहुषका ऋषियोंपर अत्याचार तथा उसके प्रतीकारके लिये महर्षि भृगु और अगस्त्यकी बातचीत  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  13.104.4 
नहुषो हि महाराज राजर्षि: सुमहातपा:।
देवराज्यमनुप्राप्त: सुकृतेनेह कर्मणा॥ ४॥
 
 
अनुवाद
महाराज! राजा नहुष महान तपस्वी थे। अपने पुण्य कर्मों के प्रभाव से उन्हें देवराज इन्द्र का पद प्राप्त हुआ था।
 
Maharaj! King Nahush was a great ascetic. Due to the effect of his pious deeds, he had attained the position of Devraj Indra. 4.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)