श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 104: नहुषका ऋषियोंपर अत्याचार तथा उसके प्रतीकारके लिये महर्षि भृगु और अगस्त्यकी बातचीत  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  13.104.19 
अमृतं चैव पानाय दत्तमस्मै पुरा विभो।
महात्मना तदर्थं च नास्माभिर्विनिपात्यते॥ १९॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! पूर्वकाल में ब्रह्माजी ने इसे अमृत पिलाया था। इसीलिए हम इस नहुष को स्वर्ग से नीचे नहीं ला रहे हैं॥19॥
 
Lord! In the past, the great Brahma had given him nectar to drink. That is why we are not bringing this Nahush down from heaven.॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)