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श्री महाभारत
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पर्व 13: अनुशासन पर्व
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अध्याय 104: नहुषका ऋषियोंपर अत्याचार तथा उसके प्रतीकारके लिये महर्षि भृगु और अगस्त्यकी बातचीत
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श्लोक 17
श्लोक
13.104.17
यो मे दृष्टिपथं गच्छेत् स मे वश्यो भवेदिति।
इत्यनेन वरं देवो याचितो गच्छता दिवम्॥ १७॥
अनुवाद
स्वर्ग में आते समय नहुष ने ब्रह्माजी से यह वर माँगा था कि ‘जो कोई मेरी दृष्टि में आए, वह मेरे अधीन हो जाए।’॥17॥
While coming to heaven, Nahusha had asked for this boon from Brahmaji that 'Whoever comes in my sight should become subservient to me.'॥ 17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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