श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 104: नहुषका ऋषियोंपर अत्याचार तथा उसके प्रतीकारके लिये महर्षि भृगु और अगस्त्यकी बातचीत  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  13.104.16 
अगस्त्य उवाच
कथमेष मया शक्य: शप्तुं यस्य महामुने।
वरदेन वरो दत्तो भवतो विदितश्च स:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
अगस्त्यजी बोले - 'महामुनि! मैं इस नहुष को शाप कैसे दे सकता हूँ, जबकि इसे वरदाता ब्रह्मा ने आशीर्वाद दिया है। यह आशीर्वाद आपको भी प्राप्त है।'॥16॥
 
Agastya said, 'Mahamuni! How can I curse this Nahush when the boon-giver Brahma has blessed him. He has been blessed, this fact is known to you as well.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)