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mahabharat 13.104.15: महामुनि! हम लोग देवताओं के राजा के रूप में बैठे इस दुष्टबुद्धि नहुष के अत्याचारों को क्यों सहन कर रहे हैं?   |   mahabharat अध्याय 13.104: नहुषका ऋषियोंपर अत्याचार तथा उसके प्रतीकारके लिये महर्षि भृगु और अगस्त्यकी बातचीत   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.104.15 
एवं वयमसत्कारं देवेन्द्रस्यास्य दुर्मते:।
नहुषस्य किमर्थं वै मर्षयाम महामुने॥ १५॥
 
 
अनुवाद
महामुनि! हम लोग देवताओं के राजा के रूप में बैठे इस दुष्टबुद्धि नहुष के अत्याचारों को क्यों सहन कर रहे हैं?
 
Mahamuni! Why are we tolerating the atrocities of this evil-minded Nahush who is sitting as the king of gods?'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)