vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 13: अनुशासन पर्व
»
अध्याय 104: नहुषका ऋषियोंपर अत्याचार तथा उसके प्रतीकारके लिये महर्षि भृगु और अगस्त्यकी बातचीत
»
श्लोक 15
श्लोक
13.104.15
एवं वयमसत्कारं देवेन्द्रस्यास्य दुर्मते:।
नहुषस्य किमर्थं वै मर्षयाम महामुने॥ १५॥
अनुवाद
महामुनि! हम लोग देवताओं के राजा के रूप में बैठे इस दुष्टबुद्धि नहुष के अत्याचारों को क्यों सहन कर रहे हैं?
Mahamuni! Why are we tolerating the atrocities of this evil-minded Nahush who is sitting as the king of gods?'
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×