श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 104: नहुषका ऋषियोंपर अत्याचार तथा उसके प्रतीकारके लिये महर्षि भृगु और अगस्त्यकी बातचीत  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  13.104.11 
स ऋषीन् वाहयामास वरदानमदान्वित:।
परिहीणक्रियश्चैव दुर्बलत्वमुपेयिवान्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
वरदान के मद में चूर होकर वे ऋषियों से अपनी रथ खिंचवाने लगे। उन्होंने अपना धर्म-कर्म त्याग दिया। फलस्वरूप वे दुर्बल हो गए और उनका धर्म-बल नष्ट हो गया॥11॥
 
Intoxicated by the boon, they started getting their carriages pulled by the sages. They left their religious duties. Hence, they became weak and they lost their religious strength.॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)