श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 104: नहुषका ऋषियोंपर अत्याचार तथा उसके प्रतीकारके लिये महर्षि भृगु और अगस्त्यकी बातचीत  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  13.104.1 
युधिष्ठिर उवाच
श्रुतं मे भरतश्रेष्ठ पुष्पधूपप्रदायिनाम्।
फलं बलिविधाने च तद् भूयो वक्तुमर्हसि॥ १॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा, "भरतश्रेष्ठ! मैंने पुष्प और धूप अर्पित करने वालों को मिलने वाले फल के विषय में सुना है। अब आप मुझे पुनः यज्ञ के फल के विषय में बताइये।"
 
Yudhishthira asked, "Best of the Bharatas! I have heard about the rewards received by those who offer flowers and incense. Now, please tell me again the rewards of offering sacrifices."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)