Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.103.8-9: उस समय सुवर्ण ने स्वायम्भुव मनु से कहा - 'हे प्रजापते! मैं समस्त प्राणियों के हितार्थ एक प्रश्न पूछता हूँ, कृपया इसका उत्तर दीजिए। यह पुष्पों से देवताओं की पूजा क्या है? इसका प्रचलन कैसे हुआ? इसका फल क्या है और इसका क्या उपयोग है? यह सब मुझे बताइए।'॥8-9॥ | mahabharat अध्याय 13.103: तपस्वी सुवर्ण और मनुका संवाद—पुष्प, धूप, दीप और उपहारके दानका माहात्म्य । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उस समय सुवर्ण ने स्वायम्भुव मनु से कहा - 'हे प्रजापते! मैं समस्त प्राणियों के हितार्थ एक प्रश्न पूछता हूँ, कृपया इसका उत्तर दीजिए। यह पुष्पों से देवताओं की पूजा क्या है? इसका प्रचलन कैसे हुआ? इसका फल क्या है और इसका क्या उपयोग है? यह सब मुझे बताइए।'॥8-9॥
At that time, gold said to Svayambhuva Manu - 'O Prajapate! I ask a question, for the benefit of all beings, please answer it. What is this worship of gods with flowers? How did it come into practice? What is its fruit and what is its use? Tell me all this.'॥ 8-9॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥