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mahabharat 13.103.7: वहाँ वे दोनों ब्रह्मर्षियों, देवताओं, दानवों और प्राचीन महात्माओं से संबंधित नाना प्रकार की कथाएँ सुनाने लगे ॥7॥   |   mahabharat अध्याय 13.103: तपस्वी सुवर्ण और मनुका संवाद—पुष्प, धूप, दीप और उपहारके दानका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 103: तपस्वी सुवर्ण और मनुका संवाद—पुष्प, धूप, दीप और उपहारके दानका माहात्म्य  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  13.103.7 
तत्र तौ कथयन्तौ स्तां कथा नानाविधाश्रया:।
ब्रह्मर्षिदेवदैत्यानां पुराणानां महात्मनाम्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
वहाँ वे दोनों ब्रह्मर्षियों, देवताओं, दानवों और प्राचीन महात्माओं से संबंधित नाना प्रकार की कथाएँ सुनाने लगे ॥7॥
 
There both of them began to narrate various stories related to the brahmarshis, gods, demons and ancient great souls. ॥ 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)