Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.103.63: जो मनुष्य देवताओं को हवि देकर पहले भोजन करता है, वह उत्तम भोगों से युक्त, बलवान और वीर्यवान होता है। अतः देवताओं को पहले आदरपूर्वक भोजन देना चाहिए ॥63॥   |   mahabharat अध्याय 13.103: तपस्वी सुवर्ण और मनुका संवाद—पुष्प, धूप, दीप और उपहारके दानका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 103: तपस्वी सुवर्ण और मनुका संवाद—पुष्प, धूप, दीप और उपहारके दानका माहात्म्य  »  श्लोक 63
 
 
श्लोक  13.103.63 
अग्रदाताग्रभोगी स्याद् बलवीर्यसमन्वित:।
तस्मादग्रं प्रयच्छेत देवेभ्य: प्रतिपूजितम्॥ ६३॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य देवताओं को हवि देकर पहले भोजन करता है, वह उत्तम भोगों से युक्त, बलवान और वीर्यवान होता है। अतः देवताओं को पहले आदरपूर्वक भोजन देना चाहिए ॥63॥
 
The man who first eats food after offering sacrifices to the gods, becomes full of good pleasures, strong and full of semen. Therefore, food should be offered respectfully to the gods first. 63॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)