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mahabharat 13.103.61: राक्षसी स्वभाव के लोग यक्षों और राक्षसों को रक्त और मांस से बनी बलि चढ़ाते हैं। इसके साथ ही सुरा और आव भी रखे जाते हैं और ऊपर से चावल का आटा छिड़क कर बलि को सजाया जाता है। 61.   |   mahabharat अध्याय 13.103: तपस्वी सुवर्ण और मनुका संवाद—पुष्प, धूप, दीप और उपहारके दानका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.103.61 
कार्या रुधिरमांसाढ्या बलयो यक्षरक्षसाम्।
सुरासवपुरस्कारा लाजोल्लापिकभूषिता:॥ ६१॥
 
 
अनुवाद
राक्षसी स्वभाव के लोग यक्षों और राक्षसों को रक्त और मांस से बनी बलि चढ़ाते हैं। इसके साथ ही सुरा और आव भी रखे जाते हैं और ऊपर से चावल का आटा छिड़क कर बलि को सजाया जाता है। 61.
 
People of demoniac nature offer sacrifices consisting of blood and flesh to the Yakshas and demons. Along with this, sura and aava are also kept and the sacrifice is decorated by sprinkling rice flour on top. 61.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)