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mahabharat 13.103.60: देवताओं को अर्पित किया जाने वाला हवन दही और दूध से बना हुआ, अत्यंत शुद्ध, सुगंधित, आकर्षक और फूलों से सजा हुआ होना चाहिए ॥60॥   |   mahabharat अध्याय 13.103: तपस्वी सुवर्ण और मनुका संवाद—पुष्प, धूप, दीप और उपहारके दानका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 103: तपस्वी सुवर्ण और मनुका संवाद—पुष्प, धूप, दीप और उपहारके दानका माहात्म्य  »  श्लोक 60
 
 
श्लोक  13.103.60 
बलय: सह पुष्पैस्तु देवानामुपहारयेत्।
दधिदुग्धमया: पुण्या: सुगंधा: प्रियदर्शना:॥ ६०॥
 
 
अनुवाद
देवताओं को अर्पित किया जाने वाला हवन दही और दूध से बना हुआ, अत्यंत शुद्ध, सुगंधित, आकर्षक और फूलों से सजा हुआ होना चाहिए ॥60॥
 
The sacrifice offered to the gods must be made of curd and milk, must be very pure, fragrant, attractive and decorated with flowers. ॥ 60॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)