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mahabharat 13.103.6: तत्पश्चात् वे दोनों सत्यसंकल्प महात्मा सुवर्णमय मेरु पर्वत की एक सुन्दर शिला पर एक साथ बैठ गये॥6॥   |   mahabharat अध्याय 13.103: तपस्वी सुवर्ण और मनुका संवाद—पुष्प, धूप, दीप और उपहारके दानका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.103.6 
ततस्तौ सत्यसंकल्पौ मेरौ काञ्चनपर्वते।
रमणीये शिलापृष्ठे सहितौ संन्यषीदताम्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् वे दोनों सत्यसंकल्प महात्मा सुवर्णमय मेरु पर्वत की एक सुन्दर शिला पर एक साथ बैठ गये॥6॥
 
Thereafter, both of them Satyasankalp Mahatma sat together on a beautiful rock face of the golden mountain Meru. 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)