Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.103.51: जो मनुष्य दीपक चुराता है, वह अंधा और दरिद्र हो जाता है और मरने के बाद नरक में जाता है, किन्तु जो दीपदान करता है, वह स्वर्ग में दीपों की माला के समान चमकता है ॥ 51॥ | mahabharat अध्याय 13.103: तपस्वी सुवर्ण और मनुका संवाद—पुष्प, धूप, दीप और उपहारके दानका माहात्म्य । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जो मनुष्य दीपक चुराता है, वह अंधा और दरिद्र हो जाता है और मरने के बाद नरक में जाता है, किन्तु जो दीपदान करता है, वह स्वर्ग में दीपों की माला के समान चमकता है ॥ 51॥
A man who steals a lamp becomes blind and destitute and after death goes to hell. However, he who donates a lamp shines like a garland of lamps in heaven. ॥ 51॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥