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mahabharat 13.103.5: एक दिन ब्राह्मण देवता ने प्रजापति मनु को देखा। उन्हें देखकर वे उनके पास गए। फिर दोनों एक-दूसरे से कुशल-क्षेम पूछने लगे।   |   mahabharat अध्याय 13.103: तपस्वी सुवर्ण और मनुका संवाद—पुष्प, धूप, दीप और उपहारके दानका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.103.5 
स कदाचिन्मनुं विप्रो ददर्शोपससर्प च।
कुशलप्रश्नमन्योन्यं तौ चोभौ तत्र चक्रतु:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
एक दिन ब्राह्मण देवता ने प्रजापति मनु को देखा। उन्हें देखकर वे उनके पास गए। फिर दोनों एक-दूसरे से कुशल-क्षेम पूछने लगे।
 
One day the Brahmin god saw Prajapati Manu. On seeing him he went to him. Then both of them started asking each other about their well-being.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)