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mahabharat 13.103.49: देवता तेजस्वी, तेजस्वी और प्रकाशवान होते हैं, जबकि दानव अंधकार प्रिय होते हैं; इसलिए देवताओं को प्रसन्न करने के लिए दीपदान किया जाता है।   |   mahabharat अध्याय 13.103: तपस्वी सुवर्ण और मनुका संवाद—पुष्प, धूप, दीप और उपहारके दानका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.103.49 
देवास्तेजस्विनो ह्यस्मात् प्रभावन्त: प्रकाशका:।
तामसा राक्षसाश्चैव तस्माद् दीप: प्रदीयते॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
देवता तेजस्वी, तेजस्वी और प्रकाशवान होते हैं, जबकि दानव अंधकार प्रिय होते हैं; इसलिए देवताओं को प्रसन्न करने के लिए दीपदान किया जाता है।
 
Gods are radiant, lustrous and emit light whereas demons love darkness; therefore lamps are offered to please the gods.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)