Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.103.48: दीपक की लौ ऊपर की ओर गति करती है। वह अंधकार रूपी रोग को दूर करने वाली औषधि है। अतः जो दीपदान करता है, वह अवश्य ही ऊर्ध्व गति को प्राप्त होता है ॥48॥ | mahabharat अध्याय 13.103: तपस्वी सुवर्ण और मनुका संवाद—पुष्प, धूप, दीप और उपहारके दानका माहात्म्य । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
दीपक की लौ ऊपर की ओर गति करती है। वह अंधकार रूपी रोग को दूर करने वाली औषधि है। अतः जो दीपदान करता है, वह अवश्य ही ऊर्ध्व गति को प्राप्त होता है ॥48॥
The flame of a lamp moves upwards. It is the medicine to cure the disease of darkness. Therefore, the one who donates a lamp, definitely attains upward movement. ॥ 48॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥