Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.103.47: अंधकार ही अंधतामिश्र नामक नरक है। दक्षिणायन भी अंधकार से आच्छादित है। इसके विपरीत, उत्तरायण प्रकाश से परिपूर्ण है। इसीलिए इसे श्रेष्ठ माना गया है। इसलिए अंधकारमय नरक से मुक्ति हेतु दीपदान की स्तुति की जाती है। 47. | mahabharat अध्याय 13.103: तपस्वी सुवर्ण और मनुका संवाद—पुष्प, धूप, दीप और उपहारके दानका माहात्म्य । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अन्धन्तमस्तमिस्रं च दक्षिणायनमेव च।
उत्तरायणमेतस्माज्ज्योतिर्दानं प्रशस्यते॥ ४७॥
अनुवाद
अंधकार ही अंधतामिश्र नामक नरक है। दक्षिणायन भी अंधकार से आच्छादित है। इसके विपरीत, उत्तरायण प्रकाश से परिपूर्ण है। इसीलिए इसे श्रेष्ठ माना गया है। इसलिए अंधकारमय नरक से मुक्ति हेतु दीपदान की स्तुति की जाती है। 47.
Darkness is the hell called Andhatamisra. Dakshinayan is also covered in darkness. In contrast, Uttarayan is full of light. That is why it is considered superior. Hence, the donation of lamps is praised for getting rid of the dark hell. 47.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥