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mahabharat 13.103.46: दीपक ऊपर की ओर प्रकाशमान होता है, वह यश और कीर्ति फैलाने वाला कहा गया है। अतः दीपदान या प्रकाश से लोगों का तेज बढ़ता है। 46॥   |   mahabharat अध्याय 13.103: तपस्वी सुवर्ण और मनुका संवाद—पुष्प, धूप, दीप और उपहारके दानका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.103.46 
ज्योतिस्तेज: प्रकाशं वाप्यूर्ध्वगं चापि वर्ण्यते।
प्रदानं तेजसां तस्मात् तेजो वर्धयते नृणाम्॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
दीपक ऊपर की ओर प्रकाशमान होता है, वह यश और कीर्ति फैलाने वाला कहा गया है। अतः दीपदान या प्रकाश से लोगों का तेज बढ़ता है। 46॥
 
The lamp is bright upward, it is said to spread glory and fame. Therefore, donation of lamp or light increases the brightness of people. 46॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)