Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.103.42: पृथ्वीनाथ! अष्टगंध आदि जो धूप, राल आदि के सुगन्धित चूर्ण तथा सुगन्धित काष्ठ-वनस्पति के चूर्ण को घी और शर्करा के साथ मिलाकर बनाई जाती है, वह कृत्रिम है। विशेषतः वह जो मनुष्यों द्वारा प्रयोग की जाती है। 42। | mahabharat अध्याय 13.103: तपस्वी सुवर्ण और मनुका संवाद—पुष्प, धूप, दीप और उपहारके दानका माहात्म्य । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पृथ्वीनाथ! अष्टगंध आदि जो धूप, राल आदि के सुगन्धित चूर्ण तथा सुगन्धित काष्ठ-वनस्पति के चूर्ण को घी और शर्करा के साथ मिलाकर बनाई जाती है, वह कृत्रिम है। विशेषतः वह जो मनुष्यों द्वारा प्रयोग की जाती है। 42।
Prithvinath! The incense like Ashtagandha etc. which is prepared by mixing fragrant powder of resin etc. and the powder of fragrant wood herbs with ghee and sugar is artificial. Especially that is used by humans. 42.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥