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श्लोक  13.103.41 
अगुरु: सारिणां श्रेष्ठो यक्षराक्षसभोगिनाम्।
दैत्यानां सल्लकीयश्च काङ्क्षतो यश्च तद्विध:॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
जो काष्ठ अग्नि में जलने पर सुगंध छोड़ते हैं, उन्हें 'सारि धूप' कहते हैं। इनमें अगुरु प्रधान है। सारि धूप यक्षों, राक्षसों और नागों को विशेष प्रिय है। राक्षसों को सल्लकी आदि वृक्षों के गोंद से बनी धूप प्रिय है॥ 41॥
 
The woods which emit fragrance when burnt in fire are called 'Sari Dhoop'. Among these Aguru is predominant. Sari Dhoop is especially liked by Yakshas, ​​Rakshasas and Nagas. Demons like incense made from the gum of Sallaki and other trees.॥ 41॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)