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mahabharat 13.103.39: धूप मुख्यतः तीन प्रकार की होती है - निरयास, सारि और कृत्रिम। इन धूपों की गंध भी दो प्रकार की होती है - अच्छी और बुरी। ये सब बातें मुझसे विस्तारपूर्वक सुनो। 39।   |   mahabharat अध्याय 13.103: तपस्वी सुवर्ण और मनुका संवाद—पुष्प, धूप, दीप और उपहारके दानका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.103.39 
निर्यासा: सारिणश्चैव कृत्रिमाश्चैव ते त्रय:।
इष्टोऽनिष्टो भवेद् गंधस्तन्मे विस्तरश: शृणु॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
धूप मुख्यतः तीन प्रकार की होती है - निरयास, सारि और कृत्रिम। इन धूपों की गंध भी दो प्रकार की होती है - अच्छी और बुरी। ये सब बातें मुझसे विस्तारपूर्वक सुनो। 39।
 
There are mainly three types of incense- Niryas, Sari and Artificial. The smell of these incense is also of two types, good and bad. Listen to all these things from me in detail. 39.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)