Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.103.34: पर्वत शिखरों पर उगने वाले सुन्दर एवं सुगन्धित पुष्पों को धोकर अथवा जल छिड़ककर, धर्मग्रन्थों में वर्णित विधि से, उपयुक्त देवताओं को अर्पित करना चाहिए ॥ 34॥   |   mahabharat अध्याय 13.103: तपस्वी सुवर्ण और मनुका संवाद—पुष्प, धूप, दीप और उपहारके दानका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 103: तपस्वी सुवर्ण और मनुका संवाद—पुष्प, धूप, दीप और उपहारके दानका माहात्म्य  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  13.103.34 
गिरिसानुरुहा: सौम्या देवानामुपपादयेत्।
प्रोक्षिताऽभ्युक्षिता: सौम्या यथायोग्यं यथास्मृति॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
पर्वत शिखरों पर उगने वाले सुन्दर एवं सुगन्धित पुष्पों को धोकर अथवा जल छिड़ककर, धर्मग्रन्थों में वर्णित विधि से, उपयुक्त देवताओं को अर्पित करना चाहिए ॥ 34॥
 
The beautiful and fragrant flowers growing on mountain tops should be washed or sprinkled with water and then offered to the appropriate deities in the manner prescribed in religious texts. ॥ 34॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)