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mahabharat 13.103.33: श्मशान या जीर्ण-शीर्ण मंदिरों में उगे फूलों का उपयोग शुभ कर्मकाण्ड, विवाह या एकान्तवास में नहीं करना चाहिए ॥33॥   |   mahabharat अध्याय 13.103: तपस्वी सुवर्ण और मनुका संवाद—पुष्प, धूप, दीप और उपहारके दानका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.103.33 
न तु श्मशानसम्भूता देवतायतनोद्भवा:।
संनयेत् पुष्टियुक्तेषु विवाहेषु रह:सु च॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
श्मशान या जीर्ण-शीर्ण मंदिरों में उगे फूलों का उपयोग शुभ कर्मकाण्ड, विवाह या एकान्तवास में नहीं करना चाहिए ॥33॥
 
Flowers grown in cremation grounds or dilapidated temples should not be used in wholesome rituals, marriages or solitary retreats. ॥ 33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)