Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.103.29: विद्वान पुरुष को चाहिए कि वह जल से उत्पन्न होने वाले कमल, उत्पल आदि पुष्प गंधर्वों, सर्पों और यक्षों को अर्पित करे।   |   mahabharat अध्याय 13.103: तपस्वी सुवर्ण और मनुका संवाद—पुष्प, धूप, दीप और उपहारके दानका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 103: तपस्वी सुवर्ण और मनुका संवाद—पुष्प, धूप, दीप और उपहारके दानका माहात्म्य  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  13.103.29 
जलजानि च माल्यानि पद्मादीनि च यानि वै।
गन्धर्वनागयक्षेभ्यस्तानि दद्याद् विचक्षण:॥ २९॥
 
 
अनुवाद
विद्वान पुरुष को चाहिए कि वह जल से उत्पन्न होने वाले कमल, उत्पल आदि पुष्प गंधर्वों, सर्पों और यक्षों को अर्पित करे।
 
A learned man should offer the lotus, utpal and other flowers that grow from water to the Gandharvas, serpents and Yakshas. 29.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)