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mahabharat 13.103.27: फूलों में दो प्रकार की गंध होती है - अच्छी और बुरी। अच्छी गंध वाले फूल देवताओं को प्रिय होते हैं। यह ध्यान रखें। 27॥   |   mahabharat अध्याय 13.103: तपस्वी सुवर्ण और मनुका संवाद—पुष्प, धूप, दीप और उपहारके दानका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 103: तपस्वी सुवर्ण और मनुका संवाद—पुष्प, धूप, दीप और उपहारके दानका माहात्म्य  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  13.103.27 
द्विविधो हि स्मृतो गन्ध इष्टोऽनिष्टश्च पुष्पज:।
इष्टगन्धानि देवानां पुष्पाणीति विभावय॥ २७॥
 
 
अनुवाद
फूलों में दो प्रकार की गंध होती है - अच्छी और बुरी। अच्छी गंध वाले फूल देवताओं को प्रिय होते हैं। यह ध्यान रखें। 27॥
 
Flowers have two types of smells – good and bad. Good smelling flowers are loved by the gods. Keep this in mind. 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)