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mahabharat 13.103.21: जो मनुष्य पवित्र है और देवताओं को पुष्प अर्पित करता है, उस पर सभी देवता प्रसन्न होते हैं और उसे जीविका प्रदान करते हैं ॥21॥   |   mahabharat अध्याय 13.103: तपस्वी सुवर्ण और मनुका संवाद—पुष्प, धूप, दीप और उपहारके दानका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.103.21 
देवताभ्य: सुमनसो यो ददाति नर: शुचि:।
तस्य तुष्यन्ति वै देवास्तुष्टा: पुष्टिं ददत्यपि॥ २१॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य पवित्र है और देवताओं को पुष्प अर्पित करता है, उस पर सभी देवता प्रसन्न होते हैं और उसे जीविका प्रदान करते हैं ॥21॥
 
The man who is pure and offers flowers to the gods, all the gods are pleased with him and provide him sustenance. ॥ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)