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mahabharat 13.103.20: यह पुष्प मन को प्रसन्नता प्रदान करता है, सौन्दर्य और ऐश्वर्य प्रदान करता है, इसलिए धर्मात्माओं ने इसे सुमन कहा है।   |   mahabharat अध्याय 13.103: तपस्वी सुवर्ण और मनुका संवाद—पुष्प, धूप, दीप और उपहारके दानका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.103.20 
मनो ह्लादयते यस्माच्छ्रियं चापि दधाति च।
तस्मात् सुमनस: प्रोक्ता नरै: सुकृतकर्मभि:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
यह पुष्प मन को प्रसन्नता प्रदान करता है, सौन्दर्य और ऐश्वर्य प्रदान करता है, इसलिए धर्मात्माओं ने इसे सुमन कहा है।
 
The flower gives joy to the mind and bestows beauty and wealth, therefore pious people have called it Suman. 20.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)