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mahabharat 13.103.17: इस पृथ्वी पर अनेक प्रकार की सोम लताएँ प्रकट हुईं। अमृत, विष और विविध प्रकार की घासें प्रकट हुईं।   |   mahabharat अध्याय 13.103: तपस्वी सुवर्ण और मनुका संवाद—पुष्प, धूप, दीप और उपहारके दानका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.103.17 
सोमस्यात्मा च बहुधा सम्भूत: पृथिवीतले।
अमृतं च विषं चैव ये चान्ये तृणजातय:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
इस पृथ्वी पर अनेक प्रकार की सोम लताएँ प्रकट हुईं। अमृत, विष और विविध प्रकार की घासें प्रकट हुईं।
 
Many kinds of Som creepers appeared on this earth. Amrit, poison and grasses of various kinds appeared.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)