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mahabharat 13.103.16: शुक्राचार्य बोले - राजन् ! पहले तप की उत्पत्ति हुई, फिर धर्म की । इस बीच लताएँ और औषधियाँ उत्पन्न हुई हैं ॥16॥   |   mahabharat अध्याय 13.103: तपस्वी सुवर्ण और मनुका संवाद—पुष्प, धूप, दीप और उपहारके दानका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.103.16 
शुक्र उवाच
तप: पूर्वं समुत्पन्नं धर्मस्तस्मादनन्तरम्।
एतस्मिन्नन्तरे चैव वीरुदोषध्य एव च॥ १६॥
 
 
अनुवाद
शुक्राचार्य बोले - राजन् ! पहले तप की उत्पत्ति हुई, फिर धर्म की । इस बीच लताएँ और औषधियाँ उत्पन्न हुई हैं ॥16॥
 
Shukracharya said – King! First asceticism originated, then religion. In the meantime creepers and medicines have emerged. 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)