Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.103.13-14: वहाँ उन दोनों के बीच वही वार्तालाप हुआ, जो आपने प्रस्तुत किया है। देवताओं को पुष्प, धूप और दीप अर्पित करने से क्या लाभ है, यही उनकी बातचीत का विषय था। उस समय दैत्यराज बलि ने महाकवि शुक्र के समक्ष यह उत्तम प्रश्न प्रस्तुत किया ॥13-14॥ | mahabharat अध्याय 13.103: तपस्वी सुवर्ण और मनुका संवाद—पुष्प, धूप, दीप और उपहारके दानका माहात्म्य । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वहाँ उन दोनों के बीच वही वार्तालाप हुआ, जो आपने प्रस्तुत किया है। देवताओं को पुष्प, धूप और दीप अर्पित करने से क्या लाभ है, यही उनकी बातचीत का विषय था। उस समय दैत्यराज बलि ने महाकवि शुक्र के समक्ष यह उत्तम प्रश्न प्रस्तुत किया ॥13-14॥
There the same conversation took place between them, which you have presented. What is the benefit of offering flowers, incense and lamps to the gods, this was the topic of their conversation. At that time the demon king Bali presented this excellent question to the great poet Shukra. ॥13-14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥