Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.103.12: असुरराज बलि ने भरपूर दक्षिणा देकर भृगुपुत्र शुक्राचार्य की पूजा की और उन्हें अर्घ्य आदि देकर उनका पूजन किया और जब वे आसन पर बैठ गए, तब बलि भी उनके सिंहासन पर बैठ गए॥12॥ | mahabharat अध्याय 13.103: तपस्वी सुवर्ण और मनुका संवाद—पुष्प, धूप, दीप और उपहारके दानका माहात्म्य । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
असुरराज बलि ने भरपूर दक्षिणा देकर भृगुपुत्र शुक्राचार्य की पूजा की और उन्हें अर्घ्य आदि देकर उनका पूजन किया और जब वे आसन पर बैठ गए, तब बलि भी उनके सिंहासन पर बैठ गए॥12॥
Asurraj Bali, who gave ample Dakshina, worshiped Bhrigu's son Shukracharya by offering Arghya etc. to him and when he sat on the seat, Bali also sat on his throne. 12॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥