श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 102: गृहस्थधर्म, पञ्चयज्ञ-कर्मके विषयमें पृथ्वीदेवी और भगवान‍् श्रीकृष्णका संवाद  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  13.102.5 
पृथिव्युवाच
ऋषय: पितरो देवा मनुष्याश्चैव माधव।
इज्याश्चैवार्चनीयाश्च यथा चैव निबोध मे॥ ५॥
 
 
अनुवाद
पृथ्वी बोली- माधव! गृहस्थ को सदैव देवताओं, पितरों, ऋषियों और अतिथियों का पूजन और आदर करना चाहिए। मैं तुम्हें यह सब कैसे करना चाहिए, बता रही हूँ; कृपया सुनो।
 
Prithvi said- Madhava! A householder should always worship and honour the Gods, ancestors, sages and guests. I am telling you how all this should be done; please listen.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)