वासुदेव उवाच
गार्हस्थ्यं धर्ममाश्रित्य मया वा मद्विधेन वा।
किमवश्यं धरे कार्यं किं वा कृत्वा कृतं भवेत्॥ ४॥
अनुवाद
भगवान श्रीकृष्ण ने पूछा - वसुन्धरे ! गृहस्थ धर्म का आश्रय लेकर मुझे या मेरे समान किसी अन्य व्यक्ति को कौन-सा अनुष्ठान करना चाहिए ? गृहस्थ को किस कार्य को करने से सफलता मिलती है ?॥4॥
Lord Krishna asked - Vasundhara! Which ritual should I or any other person like me perform after taking shelter of the household religion? By doing what does a householder get success?॥ 4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥