श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 102: गृहस्थधर्म, पञ्चयज्ञ-कर्मके विषयमें पृथ्वीदेवी और भगवान‍् श्रीकृष्णका संवाद  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  13.102.3 
संस्तुत्य पृथिवीं देवीं वासुदेव: प्रतापवान्।
पप्रच्छ भरतश्रेष्ठ मां त्वं यत् पृच्छसेऽद्य वै॥ ३॥
 
 
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! यशस्वी भगवान श्रीकृष्ण ने पृथ्वीदेवी की स्तुति करके उनसे वही बात पूछी थी, जो आज तुम मुझसे पूछ रहे हो॥3॥
 
Bharatshrestha! The glorious Lord Shri Krishna, after praising the earth goddess, had asked her the same thing which you are asking me today. 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)