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mahabharat 13.102.23: जो मनुष्य दुष्ट दृष्टि को त्यागकर इन गृहस्थ नियमों का पालन करता है, वह इस लोक में ऋषियों और महात्माओं का आशीर्वाद पाता है और मृत्यु के बाद पुण्य लोकों में सम्मानित होता है ॥23॥   |   mahabharat अध्याय 13.102: गृहस्थधर्म, पञ्चयज्ञ-कर्मके विषयमें पृथ्वीदेवी और भगवान‍् श्रीकृष्णका संवाद   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.102.23 
एतांस्तु धर्मान् गार्हस्थ्यान् य: कुर्यादनसूयक:।
स इहर्षिवरान् प्राप्य प्रेत्य लोके महीयते॥ २३॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य दुष्ट दृष्टि को त्यागकर इन गृहस्थ नियमों का पालन करता है, वह इस लोक में ऋषियों और महात्माओं का आशीर्वाद पाता है और मृत्यु के बाद पुण्य लोकों में सम्मानित होता है ॥23॥
 
The person who abandons the evil viewpoint and follows these household principles, gets the blessings of sages and great sages in this world and after death, he is honored in the virtuous worlds. 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)