श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 102: गृहस्थधर्म, पञ्चयज्ञ-कर्मके विषयमें पृथ्वीदेवी और भगवान‍् श्रीकृष्णका संवाद  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  13.102.22 
श्वभ्यश्च श्वपचेभ्यश्च वयोभ्यश्चावपेद् भुवि।
वैश्वदेवं हि नामैतत् सायंप्रातर्विधीयते॥ २२॥
 
 
अनुवाद
कुत्तों, चांडालों और पक्षियों के लिए ज़मीन पर भोजन रखना चाहिए। इसे वैश्वदेव कहते हैं। यह शाम और सुबह किया जाता है।
 
Food should be placed on the ground for dogs, chandalas and birds. This is a ritual called Vaishvadev. It is performed in the evening and morning.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)