श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 102: गृहस्थधर्म, पञ्चयज्ञ-कर्मके विषयमें पृथ्वीदेवी और भगवान‍् श्रीकृष्णका संवाद  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  13.102.2 
भीष्म उवाच
अत्र ते वर्तयिष्यामि पुरावृत्तं जनाधिप।
वासुदेवस्य संवादं पृथिव्याश्चैव भारत॥ २॥
 
 
अनुवाद
भीष्मजी बोले - नरेश्वर! भरतनन्दन! इस विषय में मैं भगवान श्रीकृष्ण और पृथ्वी के संवाद की एक प्राचीन कथा कह रहा हूँ॥2॥
 
Bhishmaji said – Nareshwar! Bharatnandan! In this regard, I am telling an ancient story of the dialogue between Lord Krishna and the earth. 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)