श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 102: गृहस्थधर्म, पञ्चयज्ञ-कर्मके विषयमें पृथ्वीदेवी और भगवान‍् श्रीकृष्णका संवाद  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  13.102.14 
तथैव विश्वेदेवेभ्यो बलिमाकाशतो हरेत्।
निशाचरेभ्यो भूतेभ्यो बलिं नक्तं तथा हरेत्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
आकाश में देवताओं को बलि दो। रात्रि में राक्षसों और भूतों को बलि दो। 14॥
 
Offer sacrifice to the gods in the sky. Offer sacrifices at night to demons and ghosts. 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)