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mahabharat 13.100.d8: हे मातले! मैं उन पुरुषों के चरणों में प्रणाम करता हूँ जो सुन्दरता और गुणों से युक्त हैं और जो युवतियों के हृदय में अचानक ही प्रवेश कर जाते हैं, अर्थात् जिनके दर्शन मात्र से युवतियाँ मोहित हो जाती हैं, यदि वे विषय-भोगों से दूर रहें।   |   mahabharat अध्याय 13.100: सबके पूजनीय और वन्दनीय कौन हैं—इस विषयमें इन्द्र और मातलिका संवाद   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 100: सबके पूजनीय और वन्दनीय कौन हैं—इस विषयमें इन्द्र और मातलिका संवाद  »  श्लोक d8
 
 
श्लोक  13.100.d8 
ये रूपगुणसम्पन्ना: प्रमदाहृदयंगमा:।
निवृत्ता: कामभोगेषु तान् नमस्यामि मातले॥
 
 
अनुवाद
हे मातले! मैं उन पुरुषों के चरणों में प्रणाम करता हूँ जो सुन्दरता और गुणों से युक्त हैं और जो युवतियों के हृदय में अचानक ही प्रवेश कर जाते हैं, अर्थात् जिनके दर्शन मात्र से युवतियाँ मोहित हो जाती हैं, यदि वे विषय-भोगों से दूर रहें।
 
O Matale! I bow at the feet of those men who are blessed with beauty and virtue and who suddenly enter the hearts of young women, i.e. those at whose mere sight young women become enchanted, if they stay away from sensual pleasures.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)