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mahabharat 13.100.d14: हे मातले! मैं सदैव उन लोगों की पूजा करता हूँ जो पूर्वजन्म में मानव सुखों को भोगकर तपस्या द्वारा स्वर्ग को प्राप्त होते हैं।   |   mahabharat अध्याय 13.100: सबके पूजनीय और वन्दनीय कौन हैं—इस विषयमें इन्द्र और मातलिका संवाद   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 100: सबके पूजनीय और वन्दनीय कौन हैं—इस विषयमें इन्द्र और मातलिका संवाद  »  श्लोक d14
 
 
श्लोक  13.100.d14 
ये भुक्त्वा मानुषान् भोगान् पूर्वे वयसि मातले।
तपसा स्वर्गमायान्ति शश्वत् तान् पूजयाम्यहम्॥
 
 
अनुवाद
हे मातले! मैं सदैव उन लोगों की पूजा करता हूँ जो पूर्वजन्म में मानव सुखों को भोगकर तपस्या द्वारा स्वर्ग को प्राप्त होते हैं।
 
O Matale! I always worship those who, after enjoying human pleasures in the previous stage of life, come to heaven through austerity.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)